केवल ‘ ग्रे वैगटेल ' कहने से स्पस्ट पहचान नहीं बनती क्योंकि भस्म / सित खंजन भी उपर उपर भस्मी या ‘ ग्रे ' होता है।
2.
एक जाति है ‘ कलकंठी मेघा पीलकिया ' “ ग्रे वैगटेल, मोतासिला कास्पिका ” जिसके प्रजननकालीन ‘ पक्षियों के रंगों के विवरण मैंने हमेशा नर से प्रजननकालीन रंगों के दिए हैं, अन्यथा स्थिति स्पस्ट कर दी गई है।
3.
प्रवासी खंजन तथा उनके चचेरे भाइयों-भस्मी शिखर पीलकिया (‘ ब्लू हैटेड यलो वैगटेल, मोतासिला फलावा बीमा ') तथा कलकंठी पीलकिया (‘ ग्रे वैगटेल, मोतासिला कास्पिका ')-का भारत में आगमन शरद ऋतु में होता है।